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 1.पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष पृष्ठभूमि 
 2.योजना की विशेषताएं pdf

पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष पृष्ठभूमि

पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष विकास में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने हेतु गठित किया गया है। यह कोष चुने हुये जिलों में विकास के हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए है।

विशेषताएँ • सर्वागींण विकास की डोर पंचायत के हाथ में
• योजना में ग्रामीणों की प्राथमिकताओं पर ध्यान
• पंचायतों को क्षमतावान बनाना
• स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सहभागितापूर्ण नियोजन
• क्रियान्वयन में पंचायतों द्वारा निगरानी

योजना की कुंजी-सहभागिता अच्छी योजना में समुदाय की सहभागिता आवश्यक है, क्योंकि वे ही उस योजना के क्रियान्वयन से प्रभावित होगें, पूरी परिकल्पना में समुदाय को केन्द्र में रखना है जिससे
• सभी प्रतिभागी योजना को अपना समक्षें
• सभी उपलब्ध संसाधन, सभी प्रतिभागियों के साथ योजना से जुड़े रहेगें
इस पूरी प्रक्रिया में ग्रामीणों को यह एहसास दिलाना है कि वे यह योजना बनाने में सक्षम हैं।

 1.जलछाजन की परिभाषा  
 2.समेकित जलछाजन प्रबंधन कार्यक्रम 
 3.जलछाजन प्रबंधन कार्यक्रम के उद्देश्य  
 4.जलछाजन की मुख्य गतिविधियाँ  
 5.जलछाजन परियोजना का बजट विवरण  
 6.झारखण्ड राज्य जलछाजन मिशन  
 7.झारखण्ड राज्य जलछाजन मिशन के कर्तव्य  

जलछाजन की परिभाषा

जलछाजन एक भूजललीय ईकाई है जहाँ विभिन्न स्रोतों से एकत्रित जल एक साझा बिन्दु से प्रवाहित होता है।

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समेकित जलछाजन प्रबंधन कार्यक्रम

वर्षा आधारित कृषि तथा लोगों के सहयोग से क्षेत्र का विकास करना ही समेकित जलछाजन प्रबंधन कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम संसाधनों का सही उपयोग समुचित उद्देश्यों की पूर्ति तथा योजनाओं का सही समायोजन है। यह कार्य 4 से 7 वर्ष की अवधि में कलस्टर एप्रोच (लगभग 5000 हेक्टेअर) से 12,000 रू0 प्रति हेक्टेअर (केन्द्रांश: राज्यांश: 90:10) की दर से किया जायेगा।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं इनके पुनः सृजन को सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय साधनों को प्रोत्साहन देने हेतु एक विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा।

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जलछाजन प्रबंधन कार्यक्रम के उद्देश्य

(क) जल, जंगल, जानवर, जन तथा जमीन का उचित संरक्षण एवं विकास करना।
(ख) पारिस्थितिकी में सही संतुलन स्थापित करना।
(ग) मिट्टी के कटाव को रोकना।
(घ) प्राकृतिक तथा वनस्पतियों को पुनर्जीवित करना।
(ड़) वर्षा जल का संरक्षण तथा भूजल को बढ़ावा देना।
(च) मिश्रित खेती तथा खेती के नई तकनीकों को बढ़ावा देना।
(छ) टिकाऊ जीविकोपार्जन पद्धति को बढ़ावा देना।

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जलछाजन की मुख्य गतिविधियाँ

(क) मिट्टी तथा जल संरक्षण के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण किया जा सकता है। जैसे-मेढ़ बन्दी, समोच्च खंतिया (contour trench), सीढ़ीदार खेत का निर्माण (टेरेसिंग), वनस्पति अवरोध इत्यादि।
(ख) घास, झाड़ीनुमा पौधें तथा अन्य बहुउद्देश्यीय पौधों के साथ-साथ दलहनी पौधों का रोपण तथा चारा क्षेत्र का विकास।
(ग) प्राकृति पुनर्जीवन को बढ़ावा देना।
(घ) कृषि वानिकी एवं बागवानी के संवर्द्धन की जानकारी ग्रामीणों तक पहुँचाना।
(ड़) लकड़ी का विकल्प ढूँढ़ना तथा जलावन लकड़ी का संरक्षण।
(च) प्रशिक्षण, प्रचार-प्रसार तथा कार्यक्रम के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
(छ) लोगों में सहभागिता को बढ़ावा देना।
(ज) सम्पत्तिविहीनों के लिए जीविकोपार्जन की व्यवस्था करना।
(झ) उत्पादन व्यवस्था तथा सूक्ष्म उद्यम को बढ़ावा देना।

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जलछाजन परियोजना का बजट विवरण

प्रशासनिक खर्च (Administrative Cost) 10 प्रतिशत
प्रवेश मूलक कार्य (EPA) 4 प्रतिशत
संस्था एवं क्षमता वर्द्धन (Institution & Capacity Building) 5 प्रतिशत
विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) 1 प्रतिशत
जलछाजन विकास कार्य (Works) 56 प्रतिशत
भूमिहीनों की आजीविका संबंधी गतिविधि (Livelihood) 9 प्रतिशत
उत्पादकता एवं लघु उद्यम (Production & Micro Enterprises) 10 प्रतिशत
अनुश्रवण (Monitoring) 1 प्रतिशत
मूल्यांकन (Evaluation) 1 प्रतिशत
समापन (Consolidation) 3 प्रतिशत
कुल (Total) 100 प्रतिशत

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झारखण्ड राज्य जलछाजन मिशन

समेकित जलछाजन प्रबंधन कार्यक्रम (IWMP) भारत सरकार के द्वारा 2009 में प्रारम्भ किया गया है। इसके क्रियान्वयन हेतु वाटरशेड विकास परियोजनाओं के लिए ‘‘समान मार्गदर्शी सिद्धान्त-2008" तैयार किए गये हैं। Common Guidelines for Watershed Development Projects 2008 में दिये गये निदेश के आलोक में ‘‘झारखण्ड राज्य जलछाजन मिशन" का गठन सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1860 के अन्तर्गत किया गया है। यह मिशन राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी (SLNA) के रूप में कार्य करता है।

झारखण्ड राज्य जलछाजन मिशन के कर्तव्य

1. राज्य के गाँवों में चलाये जा रहे जलछाजन विकास कार्यक्रमों/योजनाओं के सफल कार्यान्वयन हेतु सभी आवश्यक कदम उठाना, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, परियोजना कार्यान्वयन इकाईयों को धनराशि उपलब्ध कराना, कार्यक्रमों का अनुश्रवण, समीक्षा एवं मूल्यांकन करना एवं उनके कार्यान्वयन में उच्च कोटि की गुणवत्ता की अभिप्राप्ति।
2. जलछाजन विकास कार्यक्रमों के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार के मार्गदर्शन के अनुरूप आवश्यक नीति निर्धारण करना एवं दिशा-निर्देश जारी करना।
3. संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण, सम्मेलन, गोष्ठी एवं कार्यशालाएँ आयोजित करना।
4. जलछाजन विकास योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु जिला स्तर पर जलछाजन प्रकोष्ठ-सह-आंकड़ा केन्द्र (WCDC) का गठन मिशन की आनुषांगिक इकाई के रूप में करना तथा कार्यक्रमों के उद्देश्यपूर्ण क्रियान्वयन के लिए आवश्यक अधिकारियों का विकेन्द्रीकरण करना। 5. जलछाजन विकास से संबंधित विषयों पर शोध, अध्ययन एवं मूल्यांकन संपादित करना।
6. केन्द्र/राज्य सरकार के दिशा-निर्देश के अनुरूप जलछाजन योजना से संबंधित उच्च कोटि की मान्यता प्राप्त संस्थाओं से सम्पर्क स्थापित कर आवश्यक तकनीकी सहयोग प्राप्त करना।
7. जलछाजन विकास से संबंधित योजनाओं की प्रगति की जानकारी राज्य/केन्द्र सरकार को उपलब्ध करना।
झारखण्ड राज्य जलछाजन मिशन में जलछाजन योजनाओं के सूत्रण, क्रियान्वयन, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन हेतु तकनीकी विशेषज्ञ, GIS विशेषज्ञ, प्रशासन एवं वित्तीय प्रबंधन के विशेषज्ञों की 17 सदस्यों की प्रतिबद्ध टीम (Dadicated Team) कार्यरत है।

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जलछाजन प्रकोष्ठ-सह-आंकड़ा केन्द्र (Watershed Cell cum Data Center, WCDC)
जिला स्तर जलछाजन परियोजनाओं के सूत्रण, क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण हेतु तीन सदस्यीय एक प्रतिबद्ध टीम है जिसमें अभियंता, लेखापाल एवं डाटा इन्ट्री ऑपरेटर शामिल हैं। WCDC के अध्यक्ष, संबंधित जिला के उप-विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद है।

परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी (PIA)
जलछाजन कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण के लिए परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी (PLA) का चयन किया गया है। अबतक निम्न द्वारा योजना क्रियान्वित की जा रही है- वन विभाग, भूमि संरक्षण निदेशालय, जलछाजन प्रकोष्ठ सह आंकड़ा केन्द्र, (WCDC) पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, बी.आई.टी. मेसरा है।

प्रत्येक परियोजना (लगभग 5000 हेक्टर) के लिए विशेषज्ञों का जलछाजन विकास दल (WDT) गठित किया गया है। इस दल में चार विशेषज्ञ हैं -
अभियंता, जीवीकोपार्जन विशेषज्ञ, समाज विज्ञान विशेषज्ञ, लेखा विशेषज्ञ (WDT) के द्वारा जलछाजन परियोजना में प्रचार-प्रसार, प्रारम्भिक गतिविधि, बेसलाईन सर्वे, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग, अनुश्रवण आदि कार्य किए जाते हैं।

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वाटरशेड विकास दल(WDT) की भूमिका और उत्तरदायित्व
वाटरशेड विकास दल वाटरशेड कार्य योजना तैयार करने में वाटरशेड समिति का मार्गदर्शन करेगा। वाटरशेड विकास दल की भूमिका तथा उत्तरदायित्वों की निर्देशित सूची में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित बातें शामिल होंगी।
क) ग्राम पंचायत/ग्राम सभा की वाटरशेड समिति के गठन में और इसके कार्यकरण में सहायता करना।
ख) प्रयोक्ता समूहों तथा स्व-सहायता समूहों का गठन करना तथा इन्हें पोषित करना।
ग) यह सुनिश्चित करने के लिए कि वाटरशेड कार्य योजना में महिलाओं के प्रति संभावनाओं तथा उनके हितों को पर्याप्त रूप से प्रदर्शित किया गया है, महिलाओं को संगठित करना।
घ) सहभागी आधारमूलक सर्वेक्षण करना, प्रशिक्षण देना तथा क्षमता निर्माण करना।
ड) परिवार स्तर पर सतत् जीविका साधनों को बढ़ावा देने के लिए जल तथा भूमि संरक्षण या भूमि को पुनः उपयोग योग्य बनाने सहित विस्तृत संसाधन विकास योजनाएँ तैयार करना।
च) सार्वजनिक सम्पत्ति संसाधन प्रबंधन तथा समान भागीदारी।
छ) ग्राम सभा के विचारार्थ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करना।
ज) निर्मित की जाने वाली किसी भी संरचना के लिए इंजीनियरी सर्वेक्षण करना, इंजीनियरी अभिकल्प तथा लागत अनुमान तैयार करना।
झ) किए गए कार्य की निगरानी, जांच, आंकलन, वास्तविक सत्यापन और मापन का कार्य करना।
ञ) भूमिहीनों के लिए जीविका अवसरों के विकास में सहायता करना।
ट) परियोजना लेखों का रखरखाव करना।
ठ) आरम्भ किए गए कार्य की वास्तविक, वित्तीय तथा सामाजिक लेखा-परीक्षा की व्यवस्था करना।
ड़) परियोजनोपरान्त प्रचालन, अनुरक्षण तथा परियोजना के अवधि के दौरान सृजित की गई परिसम्पत्तियों का भविष्य में विकास करने हेतु उपयुक्त व्यवस्थाएँ स्थापित करना।

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जलछाजन समिति (Watershed Committee)
प्रत्येक परियोजना में एक से अधिक माइक्रोवाटरशेड होते हैं। प्रत्येक माइक्रो वाटरशेड में एक जलछाजन समिति का गठन किया जाता है। इसमें 11 से 19 सदस्य होते हैं। जलछाजन क्षेत्र में निवास करने वाले ग्रामीणों की आम सभा द्वारा जलछाजन समिति के सदस्यों का चयन किया जाता है। स्वयं सहायत समूह (SHG) प्रयोक्ता समूह (UG)/अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/महिला तथा भूमिहीन व्यक्तियों के प्रति निधि होंगे। इसके एक सदस्य जलछाजन सचिव होंगे। जलछाजन समिति का एक अलग बैंक खाता होगा। इसमें जलछाजन समिति के लिए विमुक्त राशि जमा की जायेगी। कार्य का क्रियान्वयन जलछाजन समिति के माध्यम से होगा।

स्वयं सहायता समूह (SHG)
स्वयं सहायता समूह में 10 से 20 सदस्य होते हैं। इनके प्रमुख कार्य निम्न है -
(क) नियमित बैठक करना।
(ख) बैठक की कार्यवाही तैयार करना।
(ग) समूह की निधि में नियमित रूप से अपना अंशदान देना।
(घ) समूह की निधि से सदस्यों के बीच आवश्यकतानुसार ऋण की वसूली करना।
जलछाजन कार्य के क्रियान्वयन में स्वयं सहायता समूह की प्रमुख भूमिका है। जलछाजन की राशि से परिक्रमी निधि देने का प्रावधान है।
आजीविका (Livelihood)
जलछाजन के अन्तर्गत ग्रामीणों को स्वरोजगार कार्यक्रमों से जोड़ा जाता है। पशु पालन, मछली पालन, रेशम एवं लाह उत्पादन आदि छोटे व्यवसाय के लिए प्रशिक्षित किया जाता है तथा आवश्यकतानुसार राशि उपलब्ध कराने के लिए बैंकों से जोड़ा जाता है।

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 1.स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना 

झारखण्ड राज्य जलछाजन मिशन के कर्तव्य

1. यह योजना ग्रामीण निर्धनों के लिये सबसे बड़ा स्वरोजगार कार्यक्रम है, जिसका शुभारंभ दिनांक 01.04.1999 से किया गया है।
2. इस योजना का उद्देश्य एक निश्चित समय सीमा के भीतर आय में पर्याप्त वृद्धि कर गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को गरीबी रेखा से उपर उठाना है।
3. इस योजना का लाभ स्वरोजगारी व्यक्तिगत अथवा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से प्राप्त कर सकते है।
4. स्वयं सहायता समूह में 10 से 20 सदस्य होगें। किन्तु आवश्यक होने पर अधिकतम 20 गरीबी रेखा से ठीक उपर के व्यक्ति सदस्य रह सकते हैं। एक सदस्य एक से अधिक समूह में नहीं रह सकते हैं।
5. प्रत्येक प्रखण्डों में 50% समूह महिलाओं का होना चाहिये।
6. कुल स्वरोजगारियों में 3% विकलांग व्यक्तियों के लिये निर्धारित है। यदि पर्याप्त संख्या में विकलांग उपलब्ध नहीं हो तो विभिन्न प्रकार की अशक्ततावाले व्यक्तियों का समूह में लिया जा सकता है।
7. कुल मिलाकर स्वयं सहायता समूह एक अनौपचारिक समूह होगा। जिसे सोसाईटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत भी कराया जा सकता है।
8. समूह को सुचारु रूप से चलाने के लिये समिति के सदस्यों द्वारा अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष का चयन किया जाना है।
9. समूह को अपना एक आचार संहिता बनाना है, जिसके तहत समूह अपना कार्यकलाप करेगें। समूह को नियमित रूप से बैठक करना एवं बचत भी करना है।
10. समूह की बचत राशि से सदस्यों के बीच आपस में लेन-देन भी करना है ताकि आगे चलकर सरकार एवं बैंक से प्राप्त अनुदान एवं ऋण का सदुपयोग कर सके।
11. समूह का बचत खाता समूह के नाम से खोला जायेगा। खाता का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
12. स्वयं सहायता समूह गठन की तिथि से 6 माह तक सुचारु रूप से चलने के उपरान्त उसका प्रथम श्रेणीकरण किये जाने का प्रावधान है। इसके तहत कुल 120 अंक निर्धारित है, जिसके विरुद्ध 90 अंक प्राप्त होने पर ग्रेड । पास माना जाता है। प्रथम श्रेणीकरण प्रखण्ड विकास पदाधिकारी एवं शाखा प्रबंधक एवं स्वयं सेवी संस्थान द्वारा किया जाता हैं।
13. स्वयं सहायता समूहों का ग्रेडिंग किसी स्वतंत्र एजेन्सी से भी कराये जाने का प्रावधान है, जिसे वित्तीय संस्थान भी स्वीकार करेगें। इस पर आयी लागत योजना मद से किया जायेगा।
14. जिन समूहों द्वारा ग्रेड । पास कर लिया है, उन्हें चक्रीय राशि के रूप में 25,000.00 रु॰ दिया जाना है, जिसमें 10,000.00 रु॰ डी॰आर॰डी॰ए॰ द्वारा अनुदान के रूप में एवं 15,000.00 रु॰ बैंक का ऋण होगा। समूह को 15,000.00 रु॰ पर ही सूद देय होगा, जो अधिकतर 9 होगा।
15. चक्रीय निधि की प्राप्ति से 6 माह के भीतर उसके कार्यकलाप को देखते हुए ग्रेड ।। के लिये आकंलन किया जायेगा। ग्रेड ।। पास करने के लिये 150 अंक निर्धारित किये गये हैं, जिसके विरुद्ध 120 अंक प्राप्त होने पर उक्त समूह को ग्रेड ।। पास की श्रेणी में रखा जाता है। यह समूह आर्थिक क्रियाकलाप प्रारंभ करने के लिये परियोजना बनाकर बैंक के पास ऋण के लिये आवेदन कर सकता है और बैंक उसके आधार पर ऋण स्वीकृत कर सकता है, जिसमें अधिकतम 1,25,000.00 रु॰ अनुदान की राशि होगी। सिंचाई परियोजनाओं के लिये अनुदान की कोई वित्तीय सीमा नहीं हैं।
16. प्रत्येक प्रखण्डों के लिये 10 चिन्हित आर्थिक क्रियाकलापों का चयन करना हैं किन्तु चार-पांच मुख्य क्रियाकलापों पर ही ध्यान केन्द्रित किया जाना है, जिन्हें वृहत्तर समूहों के लिये सम्मिलित रूप में प्रशिक्षण और लघु उद्यम हेतु चिन्हित किया जा सके। ऐसा करते समय उत्पादन, सेवा, प्रशिक्षण सुविधाओं और बाजार की दृष्टि से जिला में उपलब्ध आधारिक ढ़ांचे का उपयोग किया जा सके। ऐसे क्रियाकलापों का चयन नहीं किया जाय जिसके लिये उत्पदन विपणन में कठिनाई हो।
17. स्वयं सहायता समूहों का गठन, संवर्धन हेतु गैर सरकारी संगठनों/समूदायों आधारित संगठनों/प्रेरकों को लगाये जाने का प्रावधान है, जिसके लिए उन्हें 10,000.00 रु॰ चार किस्तों में भुगतान किया जाना है। ये गैर सरकारी संस्था समूहों के गठन से बैंक ऋण को लौटाने तक उसका अनुसरण करेंगे।
18. आधारभूत संरचना के तहत 20% राशि खर्च करने का प्रावधान है। इसके तहत उपलब्ध राशि मूलतः आधारिक संरचनागत छोटी-छोटी कमियों को पूरा करने के लिये है ताकि कार्यक्रम कार्यान्वयन अधिक प्रभावी हो सके। इस निधि का उपयोग राज्य सरकार के संसाधनों में संवर्धन के लिये कदापि नहीं किया जाना है।
19. स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत विशेष परियोजनाओं को लेने का प्रावधान है, जिसकी लागत 15 करोड़ रुपया तक हो सकती है। इस राशि का वहन केन्द्र एवं राज्य सरकारों के बीच 75:25 के आधार पर किया जाना है।
20. स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित वस्तुओं का बाजार मुहैया कराया जाना आवश्यक हैं इसके लिये यह भी आवश्यक है कि उनके द्वारा उत्पादित वस्तुओं का गुणस्तर अच्छा हो और मांग के अनुरूप हो।
21. स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित वस्तुओं के विक्री में हस्तकला बोर्ड, हस्तकरघा निगम, के॰बी॰आई॰सी॰ एवं अन्य संस्थायें महत्वपूर्ण भमिका निभा सकते हैं।
22. स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित वस्तुओं को लोकप्रिय बनाने के लिये मेलों का आयोजन, मार्केट कम्पलेक्स का निर्माण आदि कार्य किया जा सकता है।
23. इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये प्रखण्ड स्तरीय समिति एवं जिला स्तरीय समिति की सतत निगरानी एवं अनुश्रवण की आवश्यकता है।
24.ग्रामीण सूक्ष्म सिंचाई संरचना हेतु सभी प्रखंडों में उन्नत कृषि के लिए एस.जी.एस.वाई. अंतर्गत प्रति 25 डिसमील के भू-खंड पर ड्रिप सिंचाई योजना की परिकल्पना को मूत्र्त रूप दिया जा रहा है। इस योजना की इकाई लागत 29,698/-रुपये है, जिसके अंतर्गत बैंक ऋण एवं अनुदान की राशि सम्मिलित है। इस योजना के माध्यम से BPL स्वरोजगारी 25 डिसमिल के भूखंड पर सब्जी की खेती से लगभग 60,000/- सालाना शुध्द आय प्राप्त कर रहे है।
25.एस.जी.एस.वाई. आधारभूत संरचना मद अंतर्गत ही वित्त पोषण के लिए ड्रिप इरिगेशन पद्धति के तहत पौली हाउस निर्माण की अवधारणा विकसित की जा रही है। इसकी इकाई लागत 1,26,000/-रुपये निर्धारित है। इनका क्रियान्वयन सभी प्रखंडों में की जा रही है। इसके माध्यम से ड्रिप इरिगेशन पद्धति के BPL स्वरोजगारियों को उत्तम कोटि के सब्जी के पौधे सुलभता से प्राप्त होगें।

Guidelines For Integrated Action Plan(IAP)
 1.Details of IAP  
 2. Funds Flow Mechanism 
 3. Release Of Funds 
 4. Opening Of Bank Accounts 
 5. Utilization Of Interest Earned On Deposits 
 6. Maintenance Of Accounts 
 7. Monitoring 
 8. Submission Of Utilisation Certificates 
 9. Audit Of Works 
 10.Inspection Of Works 

Details of IAP

The Integrated Action Plan (lAP) for Selected Tribal and Backward Districts under the State component of BRGF programme will cover 60 districts (list at Annexure-I). The lAP will be implemented with a block grant of Rs.25 crore and Rs.30 crore per district during 2010-11 and 2011-12 respectively. A Committee headed by District Collector / District Magistrate and consisting of the Superintendent of Police of the District and the District Forest Officer will be responsible for implementation of this scheme. The District-level Committee will have the flexibility to spend the amount for development schemes according to need as assessed by it. A suitable form of consultation is to be ensured with the local Members of Parliament on the schemes to be taken up under the IAP.
The Committee should draw up a Plan consisting of concrete proposals for public infrastructure and services such as school buildings, Anganwadi Centres, Primary Health Centres, Drinking Water Supply, Village Roads, Electric "lights in public places such as PHCs and schools etc. The schemes so selected should show results in the short term.
The expenditure on these projects should be over and above the expenditure being incurred for the regular State / Central/Centrally Sponsored Schemes. The Committee should ensure that there is no duplication of expenditure on the same project. The expenditure should be incurred as per the existing Financial Guidelines / Rules of the State Government.

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Funds Flow Mechanism

Funds will be released to the Consolidated Fund of the State Government. State Government will release the funds directly into the bank account opened for this purpose by the District Collector or District Magistrate. The State Government will ensure that funds are transferred to this bank account within 15 days of the release of the funds to the Consolidated Fund of the State Government failing which the State Government should transfer to the district penal interest at RBI rate.

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Release Of Funds

In the year 2010-11, the fund will be released @ Rs.25 crore per district for the 60 districts (listed in Annexure-I) in one installment. However, the Block Grant of Rs. 30 crore per district for the year 2011-12 will be released in two installments of Rs 20 crore and 10 crore respectively. The second installment will be released on the receipt of the Utilization Certificate for block grant of Rs.25 crore for the year 2010-11.

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Opening Of Bank Accounts

The Block Grant shall be kept in a Saving Bank Account in a Public Sector Bank opened by the District Collector / District Magistrate concerned.

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Utilization Of Interest Earned On Deposits

Interests accrued on the deposits shall be treated as additional resources and would be utilized for the purposes of the schemes/projects.

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Maintenance Of Accounts

Each District Collector / District Magistrate shall be responsible for maintenance of the accounts for the funds allotted to him / her. Similarly, the District Collector / District Magistrate will also ensure that any executing agency entrusted with the funds under the scheme will also maintain separate account. Drawing of funds for making payment for the work undertaken by the executing agencies will be as prescribed in the State's Financial Rules and concerned Departmental Manual.

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Monitoring

The Development Commissioner of the State/equivalent officer in charge of development in the State will be responsible for scrutiny of expenditure and monitoring of the lAP in the State. Macro-level monitoring of the lAP will be carried out by the Committee headed by the Member-Secretary, Planning Commission. States will send district-wise monthly progress reports in the format at Annexure-II and wtll also upload the information on the Management Information System (MIS) http://pcserver.nic.in/iapmis along with the photographs of the works. It should be ensured that only actual expenditure is reported and not releases to implementing agencies.

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Submission Of Utilisation Certificates

District Collector / District Magistrate will furnish Utilization Certificates through the State Government in the format prescribed at Annexure-III.

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Audit Of Works

Regular physical and financial audit of the works taken up under the scheme shall be carried out by Chartered Accountants listed in the panel of the State Government or the AGs of the State. The audit report along with the action taken on the Auditor's observations will be submitted by the District Collectors/District Magistrate through the State Governments with the proposal for release of the second instalment for 2011-12.

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Inspection Of Works

In order to maintain quality, works undertaken under the scheme should be regularly inspected by a team of officers as decided by the three-member Committee.

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 1.आई0टी0डी0ए0(समेकित जनजाति विकास अभिकरण)-संक्षिप्त परिचय  
 2.अभिकरण के मुख्य उद्देश्य 
 3.समेकित जनजाति विकास अभिकरण में निहित शक्तियाँ 
 4.समेकित जनजाति विकास अभिकरण कार्यालय की संरचना 
 5.अभिकरण द्वारा चलाये जा रहे योजनाओं का विवरण 

आई0टी0डी0ए0 (समेकित जनजाति विकास अभिकरण)-संक्षिप्त परिचय

जनजातीय बहुल अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछ़ड़ी जाति एवं अल्पसंख्यकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास, समेकित प्रशासन एवं प्रबंधन सुनिश्चित करने के उद्देश्य की प्रतिपूर्ति हेतु कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार के संकल्प संख्या-645 दिनांक 06.02.2009 के द्वारा कार्यालय परियोजना पदाधिकारी, मेसो क्षेत्र, रांची का पुर्नगठन कर इस कार्यालय का नामकरण कार्यालय परियोजना निदेशक, समेकित जनजाति विकास अभिकरण किया गया है। उक्त संकल्प के आलोक में संस्था निबंधन अधिनियम 21/1860 के तहत इस अभिकरण का निबंधन कराया गया और इसका निबंधन संख्या-1266/10-11 है।
समेकित जनजाति विकास अभिकरण में दो निकाय है।
(1) सामान्य निकाय (2) कार्यकारिणी समिति
(1) सामान्य निकाय- इस निकाय का कार्य जनजातियों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान, प्राथमिक/मध्य विद्यालय स्तरीय शिक्षा, पेयजल, स्वच्छता, कृषि, वन, लघुसिंचाई संबंधी समस्या से ग्रसित जनजाति बहुल ग्रामों को चिन्हित कर उनके जरूरतों का पता लगाना तथा कार्य योजना एवं परियोजना तैयार कर प्रत्येक क्षेत्र के जाति हित में कार्यान्वित करना। इस कार्य हेतु विभिन्न विभागों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के लिये कर्णाकिंत किये गये राशि से संबंधित सूचना प्राप्ति के पश्चात समेकित योजनाओं का अनुमोदन, अनुश्रवण तथा जनजाति के समुचित विकास हेतु समेकित रणनीति का सूत्रण तथा अभिकरण के कार्यो के निष्पादन हेतु नीति मूलक निदेश देना इत्यादि।
योजनाओं का कार्यान्वयन, योजना स्थल को चयन के संदर्भ में दिशा-निर्देश प्रदान करना तथा लाभुकों का चयन प्रक्रिया के संदर्भ में नीति निर्धारित करना।
संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित कराने हेतु विभिन्न विभागों/समितियों में तालमेल स्थापित कराना।
दीर्घकालीन योजना के तहत संविधान की धारा 275(i)के अधीन जनजातीय क्षेत्र में जनजाति के उत्थान हेतु मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने लायक योजना तैयार करना तथा भारत सरकार के नीति निर्धारण के अनुसार ससमय स्वीकृत योजनाओं को कार्यान्वित करना।जनजातीय क्षेत्र के जनजाति के सदस्यों को जीविका उपार्जन हेतु विभिन्न स्वीकृत योजनाओं का ससमय भारत सरकार के नीति निर्धारण के तहत कार्यान्वित कराना, आई0टी0डी0ए0 क्षेत्र के अधीन ग्रामों से संबंधित सूचना एकत्रित करना तथा सर्वेक्षण कराकर क्षेत्र में आवश्यकतानुसार लागू करने लायक योजना/परियोजना तैयार करना।
कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार से प्राप्त जनजातीय उपयोजना एवं अन्य योजना हेतु प्राप्त राशि से अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़े वर्ग/निम्न आय वर्ग के लिये योजना कार्यन्वित करना तथा इसका समीक्षा करना।
सामान्य निकाय का अध्यक्ष, उपायुक्त, उपाध्यक्ष सह सदस्य सचिव, परियोजना निदेशक, आई0टी0डी0ए0 (समेकित जनजाति विकास अभिकरण) हैं तथा सदस्यों के रूप में उप विकास आयुक्त, निदेशक जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, स्थानीय सांसद, आई0टी0डी0ए0 क्षेत्र के सभी विधानसभा सदस्य, गैर सरकारी संस्थान के दो प्रतिनिधि एवं जनजातीय क्षेत्र से विशेष रूप से आमंत्रित दो प्रतिनिधि है।
(2) कार्यकारिणी समिति:- इस समिति के अध्यक्ष उपायुक्त है। परियोजना, निदेशक, समेकित जनजाति विकास अभिकरण इस समिति के उपाध्यक्ष-सह- सदस्य सचिव है।
उप विकास आयुक्त, निदेशक, डी0आर0डी0ए0, जिला योजना पदा0, जिला अभियंता, जिला परिषद एवं कार्यपालक अभियंता, एन0आर0ई0पी0-2 इस समिति के सदस्य है। कार्यकारिणी समिति सामान्य निकाय द्वारा दिये गये मार्गदर्शन, निर्धारित किये गये नीति इत्यादि के आलोक में परियोजना सूत्रण, कार्यान्वयन, अनुश्रवण, समन्वयन इत्यादि विषयक कार्य सम्पादित करती है। प्रत्येक वर्ष वार्षिक प्रस्ताव एवं वार्षिक प्रगति संबंधी प्रतिवेदन तैयार करना।

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अभिकरण के मुख्य उद्देश्य

(a)प्राथमिक/माध्यमिक शिक्षा, पेयजल, ऊर्जा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, ग्रामीण पथ, कल्याण, ग्रामीण विकास, कृषि, वन, लघु सिंचाई क्षेत्रों में विशेषकर अनुसूचित जनजाति बहुल ग्रामों में न्यूतम निहित स्तरों की प्राप्ति के लिये रणनीति, कार्ययोजना एवं परियोजनाएं बनाना। इस निमित्त विभिन्न विभागों द्वारा जिलावार निधि कर्णांकित कर सूचित किया जाना। जिला स्तरीय द्वारा अपनी योजना अभिकरण से पारित कर राज्य सरकार को सूचित किया जाना।
(b)कार्याधीन क्षेत्रों में स्थल/लाभुक चयन हेतु नीति एवं प्रक्रिया तय करना।
(c) वर्णित क्षेत्रों में हुई प्रगति की रिपोर्ट प्राप्त करना एवं समीक्षा करना।
(d) विभागों के बीच समन्वयन स्थापित करना।
(e) कल्याण विभाग से प्राप्त SCA, 275(i) GRANTS राशि को पूरक की तरह उपयोग की योजनाएं बनाना, कार्यन्वित करना एवं अनुश्रवण करना।
(f) आई0टी0डी0ए0 क्षेत्र में आनेवाली ग्रामों के संबंध में पूरा डाटा रखना, समय पर कार्यक्रमों के प्रभाव एवं उपयोगिता के संबंध में सर्वेक्षण एवं अध्ययन करना एवं विभिन्न संभावनाओं को मद्देनजर रखते हुए Perspective Plan तैयार करना।
(g) सरकार द्वारा सौपें गये अन्य कोई भी कार्य।
(h) जिला स्तर पर जनजाति उपयोजना का सूत्रण। जिला कल्याण पदाधिकारी द्वारा अनुसूचित जातियों, पिछ़ड़ी जातियों एवं अल्पसंख्यकों हेतु पूर्व में लागू की जा रही एवं समय-समय पर सरकार द्वारा निदेशित नई योजनाओं को कार्यन्वित करना।

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समेकित जनजाति विकास अभिकरण में निहित शक्तियाँ

(a) योजनाओं की स्वीकृति देना।
(b) जिला स्तर/ प्रखण्ड स्तर से प्रतिवेदन प्राप्त करना।
(c) कार्यो, संस्थाओं, कार्यालयों, अभिलेखों का निरीक्षण करना।
(d) जनजाति शिकायतों के निवारण हेतु प्रतिवेदन प्राप्त करना। इस संबंध में निर्देश/मार्गदर्शन देने की शक्ति।
(e) जनजाति/अनुसूचित जाति की सुरक्षा/उत्थान विषयक कार्यो में वार्षिक उपलब्धि का आकलन करना इत्यादि कार्य अभिकरण के संबंधित विषयक पदाधिकारी का होगा तथा इसके आधार पर संबंधित पदाधिकारी का गोपनीय अभियुक्ति तैयार करने की शक्ति।
(f) जनजातियों के हितों को सुनिश्चित करने हेतु आई0टी0डी0ए0 के जिला स्तर पर कार्यरत सभी सरकारी नियंत्रणाधीन निगमों, संस्थाओं, प्राधिकार इत्यादि की कार्यकारिणी में प्रतिनिधि भेजने का अधिकार होगा।
(g) इस अभिकरण को वही वित्तीय शक्तियाँ प्रदत्त होंगी जो वर्तमान में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण को प्राप्त है एवं समय-समय पर प्रदत्त होगी।
(h) प्रमण्डलीय आयुक्त प्रत्येक आई0टी0डी0ए0 क्षेत्र की योजनाओं का तकनीकी अनुमोदन/अनुश्रवण इत्यादि के लिये कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता तथा अन्य तकनीकी अधिकारी को नामित/प्रतिनियुक्त करेगें, जबकि समेकित जनजाति विकास अभिकरण आवश्यकतानुसार अभियंताओें को संविदा पर भी नियुक्त कर सकेगी।

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समेकित जनजाति विकास अभिकरण कार्यालय की संरचना

सभी समेकित जनजाति विकास अभिकरण के निर्माण कार्य के पर्यवेक्षण आदि के पर्यवेक्षण हेतु एक कार्यपालक अभियंता आदिवासी कल्याण आयुक्त, रांची के कार्यालय में पदस्थापित है। समेकित जनजाति विकास अभिकरण के कार्यालय प्रधान परियोजना निदेशक, समेकित जनजाति विकास अभिकरण है। एक अपर परियोजना निदेशक, एक सहायक परियोजना प्रबंधक, एक सहायक अभियंता, एक कार्यालय अधीक्षक, दो लिपिक, एक निजी सहायक सह आशुलिपिक, चार अनुसेवक एवं तीन चालक का पद सृजित किया गया है।
लेखा अंकेक्षण:- अभिकरण का लेखा का अंकेक्षण सनदी लेखाकार (CA) जिनकी नियुक्ति अभिकरण/राज्य सरकार द्वारा की जायगी के द्वारा समय-समय पर कराया जायगा। द्वितीय अंकेक्षण भारत सरकार के Comptroller & Auditor General से कराया जाना प्राधिकृत हैं।
वार्षिक प्रतिवेदन:- अभिकरण का वार्षिक कार्यकलाप एवं किये गये कार्यो का वार्षिक प्रतिवेदन कार्यकरिणी समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष प्रस्तुत कर सामान्य निकाय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है। सामान्य निकाय द्वारा अनुमोदन प्राप्ति के पश्चात इस संबंध में राज्य सरकार एवं अभिकरण के सदस्यों को अवगत कराया जाना है। वार्षिक प्रतिवेदन एवं अंकेक्षित लेखा को अभिकरण के वार्षिक सामान्य बैठक में प्रस्तुत किया जाना है। इस बैठक के पश्चात तीस दिनों के अन्दर सामान्य निकाय के सदस्यों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव एवं कार्यालय कर्मी की सूची उनके नाम, पता एवं पदनाम के साथ वार्षिक प्रतिवेदन, बैलेन्सशीट, अंकेक्षक द्वारा प्रमाणित अंकेक्षण प्रतिवदेन पंजीयन हेतु महानिरीक्षक निबंधक झारखण्ड, रांची के समक्ष भेजा जाना है।

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अभिकरण द्वारा चलाये जा रहे योजनाओं का विवरण

(क)प्रोटोटाईप की योजना:- इस योजना के तहत अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास हेतु ग्रामीण क्षे़त्रों में सिंचाई, भूमि सुधार, कृषि पद्वति के विकास हेतु कुआँ , तालाब, चेकडैम आदि का निर्माण तथा Lift irrigation द्वारा सिंचाई व्यस्था तथा भूमि समतलीकरण कर कृषि कार्य का विकास करना, ईमारती एवं फलदार वृक्षों का वृक्षारोपण करना तथा कुकुट पालन द्वारा मांस का उत्पादन इत्यादि कार्य जो स्थानीय लाभुकों की समिति गठित कर की जाती है। इस योजना से सीधे आर्थिक लाभ अनुसूचित जनजाति के लाभुकों को प्राप्त होता है।
इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2005-2006 के तीन वर्षीय प्रोटोटाईप योजना में कुल उपलब्ध राशि 1007.34 लाख रू0 के विरूद्व कार्यावन्यन एंजेसियों द्वारा अबतक कुल 787.34 लाख रू0 का व्यय किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2006-2007 का दो वर्षीय प्रोटोटाईप योजना में कुल उपलब्ध राशि 498.79 लाख रू0 के विरूद्व कार्य एजेंसियों द्वारा अबतक कुल 364.109 लाख रू0 का व्यय किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2007-2008 का तीन वर्षीय प्रोटोटाईप योजना में कुल उपलब्ध राशि 1224.60 लाख रू0 के विरूद्व कार्य एजेंसियों द्वारा अबतक कुल 903.32 लाख रू0 का व्यय किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2010-2011 का तीन वर्षीय प्रोटोटाईप योजना में कुल उपलब्ध राशि 284.35 लाख रू0 के विरूद्व कार्य एजेंसियों को मुर्गी पालन एवं जल संग्रहण सिंचाई योजना के क्रियान्वयन हेतु कुल 60.105 लाख रू0 उपलब्ध कराया गया है।

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 1.Plans of Banks of Villages With Population of More Then 2000 For Ranchi
 2.Plans of Banks of Villages With Population of More Then 2000 For Khunti
Service Area Plan For District:Ranchi
Name of Block Village of 2000(2001CensusPopulation)BR/BC/ATM Name Of BankName Of Gram PanchayatName Of Revenue VillagePopulation Of Revenue Village(2001 Census)PO/Sub PO Yes/No
ANGARAJONHA JGBSURSU SURSU2357
TATI TATI3475
RAJADERA RAJADERA 3369
GETALSUD BOI GETALSUD GETALSUD 3502 Y
BC SIRKASIRKA 2186
SIKIDIRIBOI HESATU HESATU 3021
BC
ANGARACENTRALANGARAANGARA2302Y
BOINGBERA BOINGBERA 2942
CHATRA CHATRA 4331
CHILDAG CHILDAG 3230
HESAL HESAL 4522
BERO BEROBOIBERO BERO 4707 Y
BC KHUKHRA KHUKHRA4312
DIGHIA DIGHIA2288
BERO JGB TERO TERO2135Y
CHACHKAPI CHACHKAPI2486
BERO UCO GHAGHRA GHAGHRA2684
KARANJI KARANJI2549
NEHALU KAPARIA NEHALU KAPARIA2318
BUNDU BUNDU BOI TAU TAU3388
KANCHI JGB KANCHI KANCHI2156
BUNDU SBI HUMTA HUMTA2224
BURMU UMEDANDA ALLAHABAD CHAPAR CHAPAR2307
UMEDANDA UMEDANDA 2902 Y
BURMU BOI BURMU BURMU3118
BC CHAKMECHAKME2730
MURUPIRI MURUPIRI2153
THAKURGAON BOI GINJO THAKURGAON GINJO THAKURGAON5083Y
BC GURGAIN2543
CHANHO TANGER BOI KARKAT KARKAT2619
BC CHAMA CHAMA2679
TARANGA TARANGA2093
LUNDRI LUNDRI3198
CHOREYA JGB CHOREYA CHOREYA4077
TANGER JGB TANGER TANGER2501Y
CHANHO UNITEDBALSOKRA BALSOKRA4257
PANDRI PANDRI2867
PATRATU PATRATU4723
RAGHUNATHPUR RAGHUNATHPUR2087
SILAGAIN SILAGAIN2130
KANKE KANKE JGB KOKDORO KOKDORO2173
BARHU BARHU2265
HUSIRHUSIR3039
NAGRI2168
RINPAS ALLAHABAD SUKURHUTU NORTH SUKURHUTU NORTH4854
SUKURHUTU SOUTHSUKURHUTU SOUTH3972
PITHORIA BOI PITHORIA PITHORIA5814Y
BC RARHA RARHA2871
URUGUTU URUGUTU2951
KAMRE CANARA KAMRE KAMRE2023 y
MANATU MANATU2077
SIMLIA SIMLIA4837
SUNDIL SUNDIL2211
PITHORIA CANARA ICHAPIRI ICHAPIRI3507
KATAMKULIKATAMKULI4985
NEORI IOB CHANDWEY CHANDWEY2330Y
DUMARDAG SUGNU2795
DUMARDAG2865
EAST MESRA MESRA4232Y
NEORI NEORI5157Y
BOREYA JGB BOREYABOREYA3578 Y
CHUTU CHUTU 2494
KANKE SBI ARSANDEY ARSANDEY6451 Y
HOCHARHOCHAR4944
KANKE UNITED GAGI GAGI2547Y
KANKE WEST B.AGR.UNIVER5197Y
KANKE NORTH PATRATOLI6077Y
KANKE SOUTH CHURITOLA2128
ITKI KURGI JGB KURGIPURIO3964 Y
BERO SBI GARGAON GARGAON3527Y
ITKI UNION ITKI PASHCHIM ITKI ANSH5745Y
ITKI PURBI ITKI ANSH5701
KULLI KULLI2504 Y
KUNDI KUNDI2549
RANI KHATANGA RANI KHATANGA2738Y
KHELARI KHELARI BOI BISHRAMPUR BISHRAMPUR4346Y
BUKBUKA BUKBUKA6927
HUTAP HUTAP5731Y
KHELARI KHELARI4661Y
CHURI CANARA RAI RAI6419Y
LAPRA JGB LAPRA LAPRA2519Y
TUMANG TUMANG3380
LAPUNG LAPUNG SBI DOLAICHA DOLAICHA2176
MANDER BRAMBAY ALLAHABAD NAGRANAGRA4941
RINPAS ALLAHABAD MUDMA MUDMA2037Y
BRAMBAY JGB BRAMBAYBRAMBAY3004Y
KARGE KARGE3660
MANDER SBIJHINJHRI JHINJHRI2003Y
TANGERBASLI SBI BISHHA KHATANGABISHHA KHATANGA2871
LOYO LOYO3201
SAKRA2130
SARBA SARBA2564
TANGERBASLITANGERBASLI2514Y
MANDER UNITED BANJHILA BANJHILA2357Y
BURHA KHAKHRA2032
KAIMBO KAIMBO2446
MANDER MANDER3359 Y
KATHCHACHO2180
MANDER UNION KANJIA KANJIA2771
MALTIMALTI2331
NAGRI NAGRI BOI DEORI DEORI3008 Y
BC & ATM NAGRINAGRI5264Y
NARO NARO2269
TIKRATOLI2266
SAHER SAHER2581
BALALONG JGB BALALONG BALALONG2078 Y
KUDLONG KUDLONG2099
NAGRI JGBSAPAROMSAPAROM2792Y
NAGRI SBI TUNDUL DAKSHINI TUNDUL KHAS4070
TUNDUL UTRI TUNDUL5010Y
LALGUTWA JGB LALGUTWALALGUTWA3602Y
NAMKUM TATISILWAY ALLAHABAD BARAM BARAM3375
MAHILONGMAHILONG3524
SILWAYSILWAY3303Y
HARATU2682
TATI PASHCHIM TATI 5134
TATI PURBI TATI5377
TUPUDANA BOI DUNGRIDUNGRI2067
BC & ATM 2288
NAMKUM CANARA ARA ARA4476
NAMKUM SBI RAJAULATURAJAULATU6537Y
NAMKUM UNITED BARGAWANBARGAWAN6232Y
KHIJRIKHIJRI3225Y
TUMBAGUTU2095
LALI LALI2641Y
SIDRAUL SIDRAUL2247Y
TUPUDANA UNITED SITHIO SITHIO2879Y
ORMANJHI IRBA BOB KARMA KARMA2064
ORMANJHI BOI KUCHUKUCHU2073Y
BC ORMANJHIORMANJHI3557Y
BARIDIH BARIDIH2777
ANANDI2399
SIKIDIRI BOI KUTE KUTE3011
BC
NEORI IOB IRBAIRBA4151Y
CHAKLA JGB CHAKLA CHAKLA2721
RAHE RAHE SBI RAHE RAHE2490Y
SATAKI SATAKI2243
RATU KATHITAND BOI TARUP TARUP2190
BC & ATM
RATU BOIPALI PALI2566
BC CHITARKOTA2533
TIGRA TIGRA4110
KATHITAND JGB BANAPIRI BANAPIRI2485
HURHURI HURHURI3248
SILLI SILLI BOI GORADIH GORADIH3961
BC LOTA LOTA2288
SILLI JGB SILLI SILLI4831
MURI SBI MURI WESTBARA MURI5218
MURI EAST MURI5218Y
PATRAHATU SBI BANTA HAZAM BANTA HAZAM4848
BANTA HAZAM BANTA HAZAM2762
DOWADU DOWADU2865
PATRAHATU PATRAHATU2501Y
SILLI UNION LUPUNG LUPUNG2335
SONAHATU SONAHATUBOI SONAHATUSONAHATU2160 Y
DANADIH JGB BARENDABARENDA2537
DULMIDULMI2714
HESADIH HESADIH2537
JILING SERENG JILING SERENG3241
LANDUPDIH LANDUPDIH6491
JAMUDAG JGB JAMUDAGJAMUDAG2709Y
TENTLA TENTLA2066
TAMAR RAIDIH MORE BOIBIRGAON BIRGAON3110
BCRARGAON RARGAONDIGHIA2093 Y
TAMAR JGB SARJAMDIH SARJAMDIH3757
PARASI PNB LUNGTU LUNGTU2468
PARASIPARASI3437Y
RANGAMATI SBI MULHANMUYANDIHMULHANMUYANDIH2578
TAMARUNION TAMAR EASTDODEYA5870
TAMAR WESTHINDRIDIH4798
ULILOHAR ULILOHAR2399
Service Area Plan For District:Khunti
Name of Block Village of 2000(2001CensusPopulation)BR/BC/ATM Name Of BankName Of Gram PanchayatName Of Revenue VillagePopulation Of Revenue Village(2001 Census)PO/Sub PO Yes/No
ARKIARKI UNIONBIRBANKI BIRBANKI2215 Y
NAUDHI NAUDHI2083
SINDRI JGB SINDRI SINDRI 2554 Y
KARRA GOVINDPUR BOI GOVINDPUR GOVINDPUR 2286 Y
KARRABOI KARRAKARRA 2163 Y
KHUNTI KHUNTIINDIAN BIRHU BIRHU2088
KHUNTI SBI BARUDIH BARUDIH 2319
MURHU MURHUSBIMURHUMURHU3439Y
TORPADIANKEL BOI SUNDARI SUNDARI 3589
TORPA SBI URIKEL URIKEL 2387
TAPKARA UNITED TAPKARA TAPKARA 3700 Y
TORPA UNITED TORPA PASHCHIM TORPA 3900
TORPA PURBI TORPA 4084
DORMAJGB DORMA DORMA3391 Y
  • smoking
  • plastic
  • plastic
  • plastic
  • plastic

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